Tuesday, January 10, 2012

आज की आवाज

फिर एक बार राष्ट्र की आवाज को  स्वार्थ की आवाज ने खोच दिया, दिनाक २६/१२/२०११ को राजी समझ लोकसभा  (जो की लोकतंत्र का आइना हैं ) में लोकपाल बिल पर बहस हुई और स्वार्थ की आवाज ने राष्ट्र की आवाज को नकार दिया, यानि जो लोग खुली  जुबान से लोकपाल की वकालत या सिफारिश कर रहे थे उन लोगो ने भी अपने स्वार्थ के वशीभूत होकर या विरोध दिखाकर लोकपाल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में विरोध जताया!
एक शर्मनाक और बेशर्मी की हवा की दुर्गन्ध ने सारे राष्ट्र के दम को घोट दिया, लेकिन वे लोग यह नही जानते की राष्ट्र ऐसे मरता नही हैं बल्कि राष्ट्र की अवाज कुछ चुने हुए  सांसद नहीं हैं बल्कि जनता की आवाज हैं ,मैंने पहले तो अपने साथियों से कभी नहीं कहा लेकिन आज जरुर कहना चाहता हू की भ्रष्टाचार और बेईमानी के खिलाफ इस संधर्भ को जन - आन्दोलन से  तब्दील कर के राष्ट्र को भष्टाचार से मुक्त करने का साहस कर दिखाए यही वक़्त की जरुरत हैं. !!!! 

Friday, December 16, 2011

लोंकतन्त्र का ढोंग

दुनिया के देशो में लोंकतन्त्र की परिभाषा में कौन देश सही मायने में पूरी करता हैं इस विषय में मेरी समझ कुछ ज्यदा कभी नहीं आया ,बल्कि लोंकतन्त्र का ढोल पीटती हुई दुनिया व्यवस्थाझूठी और बेईमान हैं, लोंकतन्त्र. लोकशाही की परिभाषा हैं, लेकिन दुनिया के पर्त्येक  मुल्क में इस व्यवस्था का उपहास अलग अलग किसान की ताक़त के बल पर होता रहा हैं अमेरिका की ताकत की बदसलूकी को देखते हुए लगता हैं की ताकतवर लोग या देश आदिकाल से ही ताकत का दुरपयोग करते रहे हैं, कभी कभी ऐसा महसूस होता हैं की पुराणी कहावत, "जिसकी लाठी भेस उसी की"

कर्म की आवाज

मैं एक   कर्मशील व्यक्ति हू रात को थोड़ी देर से यानि १२ बजे तक सोता हू और नियमित सुबह सवेरे ६ बजे जाग जाता हू ये मेरा नियम  हैं मैंने अपने कर्म के बल पर बहुत सारे कार्य कर्म के महल बनाये हे, अच्छी-२ फैक्ट्री,अच्छे-२ मकान, दुकान और सारी उपयोगी चीजे बनाई हैं! कर्म हमने भगवान् कृषण  की गीता से सिखा हैं, मैंने भी उसी का अनुसरण करके अपने आप को कर्म की परिभाषा के साथ जोड़ा हैं, !!!

Tuesday, December 6, 2011

कशमकश

जिन्दगी का फलसफा भी अजीब हैं जब आदमी रुकना चाहता हैं तो दौड़ना पड़ता हैं और जब दौड़ना चाहता हैं तो वक़्त रुकने का आदेश देता हैं अजीब  दस्तावेज हैं ये जिन्दगी!जब दुनिया को देखकर  अपने आपको संवारना चाहता हु तो मुश्किलों से लबालब राहे सामने आ जाती हैं और जब उदासी और मायूसी में खोने को दिल चाहता हैं तो राह चलती दुनिया गुनगुनाती हवाए बिखेरने का काम करती हैं अजीब सी दुनिया की अजीब सी राहे और हम वक़्त के हाथो में खेलते हुए खिलोने की भांति कभी टूट कर बिखर जाते हैं या फिर राह से भटक जाते हैं!!!
" बेचैन लम्हों के नाम "


Saturday, September 3, 2011

लोकतंत्र बनाम अन्ना हजारे !!

आजादी के जन आन्दोलन के बाद तथा जे. वी. के सत्ता परिवर्तन के जन आन्दोलन के बाद देश में भष्ट्राचार के विरुद्ध अन्ना हजारे का शांति पूर्ण जन आन्दोलन देश के इतिहास में याद किया जायेगा , यह जीत देश भारत के उन विचारो की जीत हैं  जो विचार आम जन मानस और नौजवान के अंदर बसा हुआ हैं, दुनिया में ऐसे अहिंसक आन्दोलनो की कम मिसाल हैं विशेषकर देश के नौजवानों के धन्यवाद और बधाई देता हूँ की उन्होने भष्ट्राचार के विरुद्ध जो ताकत दिखाई वो ही असली ताकत हैं, देश के भ्रष्ट तंत्र ने उस ताकत को पहली बार पहचाना हैं !!!

Thursday, August 18, 2011

आरक्षण के नाम पर फिल्मे!

  
 वैसे इसे हमारा दुर्भाग्य ही कहा जाएगा , की हम इंसानों में नहीं जातियों और धर्मो में   पैदा होती हैं, और मरते हैं, यह नियम प्रकर्ति विरुद्ध हैं, लेकिन हमारे समाज- शाश्त्रियो ने धरम के ठेकेदारों ने या घिनोनी राजनीती करने वाले राज-नेताओ ने समाज के इस गढ़दे में धकेला हुआ हैं जिससे हम पर्यास के बावजूद भी निकल नही पा रहे ऊपर से आरक्षण जैसी फिल्मे आग में घी का काम कर रही हैं,इसमें कोई दो राय नहीं हैं की कमजोर को, गरीब को, पिछडो को, दलितों को आगे आने का अवसर मिलना चाहिए, ना की  उनको धिक्कारना चाहिए न धमकाना चाहिए के वो दीन हीन हैं ही और धमकाओगे  तो बेचारे की हिम्मत व् विश्वाश टूटेगा इसलिए फिल्मों से सन्देश और नसीहत मिले जो गरीब के लिए उत्साहवर्धक हो, स्वस्थ हो और समस्या को हल करने वाली हो रास्ता बताने वाली हो,
चरित्र हमेशा शीर्ष से मिलता हैं किसी बच्चे ने आज तक अपने बाप  का चरित्र  नहीं दिया , इसलिए शिक्षित लोगो के, बडे लोगो के तथाकथित बड़ी जातियों के अपने चारित्रिक बदलाव लाना चाहिए और गरीब, दीन हीन को गले से लगाना चाहिए!!

""छोड़कर अपने स्वार्थ की बातें उन्हें भी गले से लगालो तो   कोई बात बने !!
धमकाने और सताने से कुछ नहीं मिलता उनके साथ मिलके मुस्कुराओ तो कोई बात बने !!

Wednesday, August 17, 2011

अन्ना के साथ बदसलूकी !!

आखिरकार सता के दुरूपयोग की कथा की शुरवात भारत सरकार ने दिली की धरती पर अन्ना के साथ दुर्वव्हार करके बता ही दिया की लोकतंत्र में हमारा विश्वाश नहीं, अगर किसी ने भष्ट्राचार के विरुद्ध आवाज उठाई , तो हम उसका जवाब तुगलकी अंदाज़ में देंगे, वो चाहे योग गुरु रामदेव हो या समाज सेवी अन्ना हजारे, उसको ठिकाने लगाने में कोई देर नहीं लगायेगे ,दिली की भीगी सडको पर भागते हुए बदहवास लोगो की भीड़ आज देखी जा सकती हैं!

ये मेरे देश के लोगो अगर आपने ऐसी निरंकुश सता के ठेकेदारो को भी जवाब नहीं दिया तो यह आपके जीवन पर भी धिकार होगा और देश के लिए क़ुरबानी देने वाले महान सपूतो के जीवन पर भी कलंक होगा! """"आओ उठो और बिगडते हुए लोकतंत्र की तस्वीर को सावरे"""!!11