Monday, August 9, 2010
आज हमारे देश की जरुरत हैं ! एक ऐसे सोच की वक्तित्व की जो सार्वभोमिक हो जिसकी सोच स्वार्थी न होकर जन कल्याण की हो जो मिडिया की चमचागिरी न करके सचाई के धरातल पर खड़ा होकर देश का हित करने का कार्य करे सचाई की और जनहित की बात कहने में जो किसी से डरता व घबराता न हो जिन लोगो के कंधो पर देश का भार यहाँ की जनता ने छोढा हैं! राज्नितिगे हो या प्रशासनिक अधिकारी सब अपनी जेब भरने में लगे हैं! कितनी शर्म की बात हैं की आज जब अंतर्राष्ट्रीय खेल होने जा रहे हैं दुनिया के बहुत सारे देश भारत की तरफ देख रहे हैं वही राज्नितिगे कांग्रेस पार्टी की आकाऔ के भारी भारी ठेकैदारी की कमिशंन का हिसाब सामने ला रहे हैं! यह देश की अस्मत का सोद्दा नहीं तो क्या हैं! चन्द्र शेखर आजाद , भगतसिंह व अशफाक उल्ला के शहीदी कीमत का भारत यही हैं क्या हम इसी भारत को बनाने निकले थे ,जहा आज भी गरीब आदमी रोटी के बदले अपनी इज्जत गिरवी रख देता है कुछ पैसो की खातिर अफसरों के हाथ देश बिक जाता हैं! तब यह पंक्तिया याद आती हैं ''जिन्हे हम हार समझे थे गलाअपना सजाने को वो ही अब साँप बन बेठे हमारे काट खाने को''
Wednesday, August 4, 2010
पत्रकारिता
मीडिया या पत्रकारिता किसी भी देश व समाज का आइना हैं लेकिन आज स्वस्थ पत्रकारिता व मीडिया का आभाव हैं! ऐसा लगता हैं की जैसे निजी स्वार्थ और लालच ने सबको अपने आगोश मैं कैद कर लिया हो ! दुसरो की बदनामी करने और लालच में वशीभूत होकर मीडिया न्याय के मार्ग से भटक सा गया है जो किसी भी देश व समाज के लिए अभिशाप है ! इससे भी बड़ी बात यह है की सभी समाज के सुधारक व शाशन वयवस्था तथा सरकार तक इस सर्पदंश से डरने लगे है जो वास्तव मैं लोकतंत्र के लिए खतरनाक खेल से कम नहीं हैं ! काश हमने अपने मीडिया की नीव स्वार्थ की राजनीती से दूर पुरानी पत्रकारिता के गौरव शाली इतिहास पर राखी होती तो अच्छा होता जिससे हमारे देश के भविष्य का निर्माण होता !!!!
Tuesday, August 3, 2010
राष्ट्रमंडल खेल
वर्तमान में चर्चित राष्ट्रमंडल खेल का विषेय देश के मान- सम्मान व् स्वाभिमान के उचिकिरित करने के लिए बहस होनी चहिये ! लकिन दुर्भाग्य है की जिस तरह एक दुसरे पर कीचड़ उछालने का काम हो रहा है शर्मनाक है ! हा यह सही है की जिसने अपनी जिमेदारी नहीं निभाई उसकी स्वस्थ आलोचना होनी चहिये लकिन निजी स्वार्थो से ऊपर होकर कार्यकर्मो को अच्छा बनाने के लिए व् अपने देश के गौरव और सम्मान को बढाने के लिए कदम उठाने चहिये . भारत का स्वाभिमान सर्वव्यापक है चाहे उसकी जो भी कीमत चुकानी पड़े ! करोडो नौजवानों के इस देश में खिलाडी अपनी प्रतिमा दिखा सके और अपने देश का सम्मान बड़ा सके ! यह जरुरी है !!
डी पी यादव
डी पी यादव
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