मीडिया या पत्रकारिता किसी भी देश व समाज का आइना हैं लेकिन आज स्वस्थ पत्रकारिता व मीडिया का आभाव हैं! ऐसा लगता हैं की जैसे निजी स्वार्थ और लालच ने सबको अपने आगोश मैं कैद कर लिया हो ! दुसरो की बदनामी करने और लालच में वशीभूत होकर मीडिया न्याय के मार्ग से भटक सा गया है जो किसी भी देश व समाज के लिए अभिशाप है ! इससे भी बड़ी बात यह है की सभी समाज के सुधारक व शाशन वयवस्था तथा सरकार तक इस सर्पदंश से डरने लगे है जो वास्तव मैं लोकतंत्र के लिए खतरनाक खेल से कम नहीं हैं ! काश हमने अपने मीडिया की नीव स्वार्थ की राजनीती से दूर पुरानी पत्रकारिता के गौरव शाली इतिहास पर राखी होती तो अच्छा होता जिससे हमारे देश के भविष्य का निर्माण होता !!!!

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