दुनिया के देशो में लोंकतन्त्र की परिभाषा में कौन देश सही मायने में पूरी करता हैं इस विषय में मेरी समझ कुछ ज्यदा कभी नहीं आया ,बल्कि लोंकतन्त्र का ढोल पीटती हुई दुनिया व्यवस्थाझूठी और बेईमान हैं, लोंकतन्त्र. लोकशाही की परिभाषा हैं, लेकिन दुनिया के पर्त्येक मुल्क में इस व्यवस्था का उपहास अलग अलग किसान की ताक़त के बल पर होता रहा हैं अमेरिका की ताकत की बदसलूकी को देखते हुए लगता हैं की ताकतवर लोग या देश आदिकाल से ही ताकत का दुरपयोग करते रहे हैं, कभी कभी ऐसा महसूस होता हैं की पुराणी कहावत, "जिसकी लाठी भेस उसी की"
Friday, December 16, 2011
कर्म की आवाज
मैं एक कर्मशील व्यक्ति हू रात को थोड़ी देर से यानि १२ बजे तक सोता हू और नियमित सुबह सवेरे ६ बजे जाग जाता हू ये मेरा नियम हैं मैंने अपने कर्म के बल पर बहुत सारे कार्य कर्म के महल बनाये हे, अच्छी-२ फैक्ट्री,अच्छे-२ मकान, दुकान और सारी उपयोगी चीजे बनाई हैं! कर्म हमने भगवान् कृषण की गीता से सिखा हैं, मैंने भी उसी का अनुसरण करके अपने आप को कर्म की परिभाषा के साथ जोड़ा हैं, !!!
Tuesday, December 6, 2011
कशमकश
जिन्दगी का फलसफा भी अजीब हैं जब आदमी रुकना चाहता हैं तो दौड़ना पड़ता हैं और जब दौड़ना चाहता हैं तो वक़्त रुकने का आदेश देता हैं अजीब दस्तावेज हैं ये जिन्दगी!जब दुनिया को देखकर अपने आपको संवारना चाहता हु तो मुश्किलों से लबालब राहे सामने आ जाती हैं और जब उदासी और मायूसी में खोने को दिल चाहता हैं तो राह चलती दुनिया गुनगुनाती हवाए बिखेरने का काम करती हैं अजीब सी दुनिया की अजीब सी राहे और हम वक़्त के हाथो में खेलते हुए खिलोने की भांति कभी टूट कर बिखर जाते हैं या फिर राह से भटक जाते हैं!!!
" बेचैन लम्हों के नाम "
" बेचैन लम्हों के नाम "
Saturday, September 3, 2011
लोकतंत्र बनाम अन्ना हजारे !!
आजादी के जन आन्दोलन के बाद तथा जे. वी. के सत्ता परिवर्तन के जन आन्दोलन के बाद देश में भष्ट्राचार के विरुद्ध अन्ना हजारे का शांति पूर्ण जन आन्दोलन देश के इतिहास में याद किया जायेगा , यह जीत देश भारत के उन विचारो की जीत हैं जो विचार आम जन मानस और नौजवान के अंदर बसा हुआ हैं, दुनिया में ऐसे अहिंसक आन्दोलनो की कम मिसाल हैं विशेषकर देश के नौजवानों के धन्यवाद और बधाई देता हूँ की उन्होने भष्ट्राचार के विरुद्ध जो ताकत दिखाई वो ही असली ताकत हैं, देश के भ्रष्ट तंत्र ने उस ताकत को पहली बार पहचाना हैं !!!
Thursday, August 18, 2011
आरक्षण के नाम पर फिल्मे!
वैसे इसे हमारा दुर्भाग्य ही कहा जाएगा , की हम इंसानों में नहीं जातियों और धर्मो में पैदा होती हैं, और मरते हैं, यह नियम प्रकर्ति विरुद्ध हैं, लेकिन हमारे समाज- शाश्त्रियो ने धरम के ठेकेदारों ने या घिनोनी राजनीती करने वाले राज-नेताओ ने समाज के इस गढ़दे में धकेला हुआ हैं जिससे हम पर्यास के बावजूद भी निकल नही पा रहे ऊपर से आरक्षण जैसी फिल्मे आग में घी का काम कर रही हैं,इसमें कोई दो राय नहीं हैं की कमजोर को, गरीब को, पिछडो को, दलितों को आगे आने का अवसर मिलना चाहिए, ना की उनको धिक्कारना चाहिए न धमकाना चाहिए के वो दीन हीन हैं ही और धमकाओगे तो बेचारे की हिम्मत व् विश्वाश टूटेगा इसलिए फिल्मों से सन्देश और नसीहत मिले जो गरीब के लिए उत्साहवर्धक हो, स्वस्थ हो और समस्या को हल करने वाली हो रास्ता बताने वाली हो,
चरित्र हमेशा शीर्ष से मिलता हैं किसी बच्चे ने आज तक अपने बाप का चरित्र नहीं दिया , इसलिए शिक्षित लोगो के, बडे लोगो के तथाकथित बड़ी जातियों के अपने चारित्रिक बदलाव लाना चाहिए और गरीब, दीन हीन को गले से लगाना चाहिए!!
""छोड़कर अपने स्वार्थ की बातें उन्हें भी गले से लगालो तो कोई बात बने !!
धमकाने और सताने से कुछ नहीं मिलता उनके साथ मिलके मुस्कुराओ तो कोई बात बने !!
Wednesday, August 17, 2011
अन्ना के साथ बदसलूकी !!
आखिरकार सता के दुरूपयोग की कथा की शुरवात भारत सरकार ने दिली की धरती पर अन्ना के साथ दुर्वव्हार करके बता ही दिया की लोकतंत्र में हमारा विश्वाश नहीं, अगर किसी ने भष्ट्राचार के विरुद्ध आवाज उठाई , तो हम उसका जवाब तुगलकी अंदाज़ में देंगे, वो चाहे योग गुरु रामदेव हो या समाज सेवी अन्ना हजारे, उसको ठिकाने लगाने में कोई देर नहीं लगायेगे ,दिली की भीगी सडको पर भागते हुए बदहवास लोगो की भीड़ आज देखी जा सकती हैं!
ये मेरे देश के लोगो अगर आपने ऐसी निरंकुश सता के ठेकेदारो को भी जवाब नहीं दिया तो यह आपके जीवन पर भी धिकार होगा और देश के लिए क़ुरबानी देने वाले महान सपूतो के जीवन पर भी कलंक होगा! """"आओ उठो और बिगडते हुए लोकतंत्र की तस्वीर को सावरे"""!!11
Tuesday, August 16, 2011
रक्षाबंधन
रक्षाबंधन के दिन जब मैं घर से निकला चलते चलते ठिठक कर एक मौड़ पर रुका, एक युवती ने मुझे आवाज दी दीन सी, हीन सी, फीकी मुस्कान के साथ मुझसे कह रही थी, मैं भी तुम्हारी बहन हु, देखो मेरी आँखों मैं भी सपने हैं, कही सीमा पर या सीमा पार गए जो भी मेरे अपने हैं , वक़्त की बेहरमी से लडते लडते में थक गई हु, नहीं तो मैं कोई बीता वक़्त नहीं, मैंने गौर से देखा उसके चेहरे की तरफ गरीबी और आभाव की निशानी उसके चेहरे पे थी! बेवजह अपमान सहने की कहानी उसके चेहरे पे थी. मैंने कहाँ में तो तुम्हारा कोई नहीं कैसे जानती हो मुझे , उसने कहाँ, मेरा तुम्हारा भाई बहन का रिश्ता हैं, मुझे देखकर भी, छोड़कर भागे जा रहे हो, में इसलिए राखी लेकर खड़ी हु, शायद तुम आभाव, गरीबी, भय, और आतंक से युद्ध करने जा रही हो. !!!!
Friday, August 12, 2011
Monday, August 8, 2011
समीक्षा लोकतंत्र की
अन्ना हजारे ने अपने बूते दिल्ली में लोकतंत्र की समीक्षा कर ही डाली बढती उम्र के अनुभवी कदमो ने फिर एक बार चांदनी चौक के आम आदमी के मन को नाप डाला तो पता चला की जनता का मन और मत कपिल सिबल के साथ नहीं बल्कि एक भष्ट्राचार के विरुद्ध उठी आवाज के साथ हैं , मंथन हुआ बेशक यह मंथन सुर और असुरो की वक़्त का न सही यह मंथन हैं आजाद भारत के लोकतंत्र का जहाँ का आम आदमी चाहता हैं की कानून सबके साथ एक जैसा हो चाहे कोई रजा हो या रंक हो अंधे कानून की लाठी की चोट पूंजीपति और गरीब, नौकरीपेशा और अधिकारी, नायाधिश और पटवारी सबकी सिर पर एक जैसी होनी चाहिए!!!!
शिक्षित भी बेरोजगार
किसी भी आजाद मुल्क की चुनी हुई सरकार की जिम्मेदारी उस देश के नागरिको को रोजगार मोहैया कराने की होती हैं, लेकिन अजीब मुल्क के बशिँदै हैं हम लोग, जहाँ का नौजवान शिक्षित होकर भी दर-दर की ठोकर खाने के लिए मजबूर हैं, मासूम होकर वह अपराध, चोर व डाकू बन रहा हैं, अब तो शिक्षा से भी नौजवान का विशवाश उठने लगा हैं इसलिए उ. प. के व्यव् सयिक शिक्षको ,के दाखिलो की भारी कमी आई हैं यह हैं हमारे जैसे देश की बेइमानी !!!!!
Saturday, August 6, 2011
देश के साथ भी खेल
यह खेल हैं इस देश के मिडिया के आये दिन काका हाथरसी की हास्य कविता याद आती हैं, नाम मिला और तो काम मिला कुछ और यानि वाह रे इस देश के मिडिया और टी. वी चैनल तुझे गरीब गावं और बेरोजगार से तथा देश के बिखरते ,परेशान हालत नौजवान से जैसे कोई सारोकार नहीं बस चैनल की टी.र.पी कैसे उन्नत हो चाहे इसके लिए किसी भी आदर्श की कुर्बानी देनी पड़े दी जा सकती हैं, सारा आलम घबरा उठा इस बेशरम दर्द से किसी में झूठे और फर्जी चेंनेलो का सामना करने की हिम्मत नहीं, जो सरकार जायदा पैसा दे वो चैनल उसी का हो जाता हैं!
Thursday, July 14, 2011
अमर शहीदों के नाम
ये देश हमारा देश यानि भारत देश यानि मेरा देश जब आजाद हुआ होगा तो आजादी के लिए यातना भोगने वाले ,जेल काटने वाले या अमर शहीदों ने अपना सावार्थ नौछवर करने वाले चंदेर्शखेर ,आजाद भगतसिंह ,राजगुरु सुखदेव व् अशरफ उल्ला जैसे बहादुर बेटो ने यह सोचकर शहीदी दी होगी की कल एक भारत बनेगा जो गुलामी से मुक्त होगा , जहाँ अंग्रेज नही होगा, जहाँ उत्पीडन नहीं होंगा, जहा दुविधा नहीं होंगी और नहीं होगी गरीबो, मजदूरो, व किसानो की इज्ज़त नीलाम , आजादी मिल गयी लेकिन बाकि स्वाभिमान लुटता रहा पिटता रहा, और हमारी बेबस आंखे तलाशती रही अपने पूर्वजों के सपनो को की कही और कभी वो भी सच होंगे आज भी उन्ही का इंतज़ार हैं !
वर्तमान और नौजवान (हिन्दुस्तान का नौजवान)
असलियत में इस देश के नौजवान की पीड़ा को पहचानने का काम किसी ने कभी किया ही नहीं वदलाव हमेशा सता से आता हैं या फिर आन्दोलन से, सता इस देश में बहुत दिनों तक कांग्रेस की रही, उन्होने नारे तो नौजवानों से खूब नारे लगवाए लेकिन जब नौजवान को कुछ देने व अधिकारों की बात आई तो हमेशा सता पक्ष इधर उधर की बात करता रहा, हालाँकि बहुत सारे समाजसवियो व नौजवानों को हम जैसे हमदर्दों ने अवाज दी और कहा , की देवता का कारवां क्यों लुटा लेकिन जवाब कभी नहीं आया ,जो देश व् भविष्य की असली ताकत हैं अगर उसकी अनदेखी इस तरह होगी तो कौन सा भारत हम बनायेगे , कोई नहीं जानता !
Tuesday, July 12, 2011
१. घटना या दुर्घटना या फिर कुछ और /तेरी दुआ बन गई मेरी दवा !
यह घटना खुद मेरे साथ दिनाक ९/७/११ के पंजाब के सगरूर प्रान्त के मूनक में घटी रात्रि का १ बजा था मैं तथा मेरे सहयोगी दो गाडियों में हिसार से एक प्रतिष्ठित परिवार कमिश्नर की बेटी की शादी से वापिस लौट रहे थे चण्डीगढ़ के लिए ,अचानक घर्र्घर नदी के पुल से पहले सड़क में ९० अंगेल का मौड़ आया ना मैं तैयार था और ना ही मेरा ड्राईवर लेकिन वक्त तैयार था, अचानक मेरी गाड़ी जिसकी रफ़्तार १२० के करीब थी लहराई और नदी के किनारे पर पलडा खाती हुई नीचे पेड़ो के झुरमुट में उलटी होकर रुक गयी ,मेरे पीछे बाकि पोलिसे की सुरक्षा गाड़ी का भी यही हाल हुआ वो भी पलट गयी ,होश हवास लापता हो गये लेकिन भगवान की दी हुई हिम्मत फिर काम आ गयी मैंने अपनी गाड़ी को ऊपर वाले गिएर को तोड़ डाला , और हिम्मत ए मर्द ,मर्द ये खुदा की कहावत चिरर्त्ताथ हो गई ,में गाड़ी के बाहर आ गया और फिर सारे सटाफ को दोनों गाडियों से बाहर निकाला पोलिसे अधिकारियो को घटना की सुचना दी, ताकि हमे सहायता मिल सके यह देखकर जरुर साहस हुआ! लेकिन इतने भयानक मोड पर भी सड़क ज्ञानवर्धन का कोई चिन्ह सरकार ने नही लगाया था, जिसकी वजह से दुर्घटना हुई, हम अमबुलंस से मूनक शहर के सिविल हॉस्पिटल में गये, घायल लोगो की फर्स्ट अड़ हो गयी अब तक यकीं नहीं होता की हम बच गए , इलाज के बाद में अपने सहयोगियों के साथ अपनी सुगर मिल धुरी चला गया ,तब तक समाचार आख्बर्रो में छप चूका था बस ऐसे लगा जैसे काँटा लगा मेरे पाव मैं और दर्द हो गया सारे गाव मैं , मोबाइल फोंस की झड़ी लग गयी ऐसा लगा जैसे सर्री दुनिया मेरी हमदर्द हैं और भगवन मेरा मालिक ,ऐसा लगा की जैसे आप लोगो की दुआऊ ने दवा बनकर मेरी रक्षा कर ली ,मैं फिर आज दिनाक ११ को डेल्ही के लिए और मेरी टूटी गाड़िया वोर्क्शोप के लिए रवाना हो गए !!
Monday, June 27, 2011
षड़यंत्र !
वास्तव में षड़यंत्र के अंतर्ग्रत कुछ ऐसी घटनाये आती हैं जो वास्तव में दुसरे को धराशयी करने का अवसर ढूंडा जाता हैं जैसा षड़यंत्र पिछले दिनों कांग्रेस सरकार के लोगो ने एक ऐसे सन्यासी के साथ किया जिसने देश के गरीबो के आंसूओ को पहचाना, सुख्ये होंठो की हंसी, व बीमारों की सान्तवना देने का काम किया या कोशिश की उसके साथ क्या हुआ, क्या होता हैं अंजाम के विरुद्ध आवाज उठाने का अंजाम किस घिनोने रूप में सरकार ने दिया उसको आप सब नें देखा होंगा !
अगर आजाद भारत की तस्वीर इसी तरह बिगडने की कोशिश हुकुमरान करती रहे और देश के नौजवान चुप बेठे बेठे देखते रहे तो लोकतंत्र के खाते को कौन बचायगा खुदा जाने !!
शीला की जवानी
जिस देश में शीला की जवानी पर कहकहे उठते हो और नौजवान झूमते हो उस देश के नौजवानों के बारे में कोई ठोस राय बनाना असंभव तो नहीं थोडा कठिन जरुर हैं ,लगातार नेतिकता की ये गिरावट हमारे पतन की प्रतीक दिखती हैं हालांकि हम जयादातर लोग इसे अपना उत्थान मान बेठे हैं मनोरंजन बुरा नहीं हैं लेकिन स्वस्थ मनोरंजन हो तो जायदा मजा आता हैं हालांकि में नौजवान वर्ग की भावनायों के विरुद्ध कभी नहीं रहा लेकिन सचेत करना अपना धरम समझता हूँ !
Wednesday, June 22, 2011
राजनैतिक रोटियों का अंदाज
राजनैतिक रोटिया सेकने का जितना घिनोना अंदाज़ हमारे मुल्क भारतवर्ष में हैं उतना दुनिया में कही भी नहीं , चाहे बिखरी हुई हिंसात्मक लाशे हो, या बेअबरु होती हुई किसी अबला की कहानी या रेप की शिकार कोई बेबस युवती, हर मोड़ पर राजनीती हैं उसको सरल स्वभाव वाला आम आदमी अंजाम नहीं देता बल्कि समाज मैं अपने आपको सभ्यता के ठेकेदार बताने वाला ही कोई देता हैं , वाह रे इस देश के टी.वी चैनल और मीडिया की लोगों तुम्हारा भी कोई जवाब नहीं तुम घायल को दावा नहीं बल्कि और गहरे घाव देते हो और बाद में उस पर मरहम भी छिड़क देते हो !
अन्ना हजारे और योग गुरु रामदेव इसके ज्वलंत उदाहरण हैं !!!
अन्ना हजारे और योग गुरु रामदेव इसके ज्वलंत उदाहरण हैं !!!
Friday, June 10, 2011
फिर एक बार आवाज उठी!
बाबा रामदेव जी ने फिर भष्ट्राचार व भष्ट्राचारियो, के विरुद्ध देश की जनता की जगाने की आवाज दी हैं . योग गुरु की कलम झूठी नहीं हैं देश के लोगो की पसीने की कमाई को लूट कर जिन हुकुमरानो ने देश के बाहर अपनी ऐश परास्ती के लिए बाहर देशो और बैंको में अपने काले धन को जमा किया हैं, उसका खुलासा और उनकी विरुद्ध कार्यवाही की जाए, एक देश भगत की आवाज देश के हित में उभरी हम देश के सभी स्वाभिमानी लोगो को उनका साथ देना चाहिए ताकि देश में छुपे गद्दारों के चेहरे बेनकाब हो, ४ जून को शुरू हुआ आन्दोलन सफल हो ऐसी शुभ कामनाये हमारी होनी चाहिए!
Thursday, June 9, 2011
हमारा नेतिक पतन
आज जबकि दुनियाभर में एक अजीब रफ़्तार का युग हैं सब एक दुसरे से आगे निकलने की चेष्टा में भागे जा रहे हैं, आगे बढने की चाह में बहुत कुछ पीछे छुट गया हैं पीछे छुट गई हमारी अद्यात्मिक शांति ,एक दुसरे के प्रति हम दर्दी ,हमारा सुख और चैन , अराजकता सी हैं आगे बढने की दौड़ में शामिल होंना कोई बुरी बात नहीं हैं,लेकिन जिन्दगी की कीमत पर नहीं नेतिकता की कीमत पर नहीं , अगर हम चंद सिक्को के लिए जिन्दगी जीने का अर्थ ही भूल गए तो एक अन्धकार में खो जाने का डर हमेशा बना रहेगा,
बात और बहस आज के संधर्भ में शिक्षा की होनी चाहिए ,रोजगार की होनी चाहिए ओर किस तरह हम देश के करोड़ो नोजवान को सही दिशा डे सकते हैं, लेकिन हम दिन बा दिन एक गुमराही अंधरे की तरफ चलते जा रहे हैं , जिससे खबरदार रहना हैं!
दुर्भाग्यपूर्ण
देश के इतिहास में फिर एक हिटलरी आदेश व तुगलकी आवाज के बयान यानि सता ने एक बार फिर अपनी क्रूरता का परिचय दिया , एक सन्यासी जो देश और दुनिया के गरीबो को अपने योग शाश्त्र के आधार पर जीवन जीने की राह दिखा रहा था उसने देश में फेले भष्ट्राचार व भष्ट्राचारियो, सत्ता के दलालों के विरुद्ध जेहाद छेड़ने की कोशिश की लेकिन बेईमान और भष्ट्राचार डूबकी लगाकर इस देश के मेहनत काश लोगो के धन को डकार कर विदेशी बेंको में जमा करा दिया , तुमने अपना करिश्मा बाबा रामदेव पर लाठी बरसाकर गरीब लोगो की भावना को लहुलुहान करने का काम कर डाला वाह रे भारतवर्ष के रहनुमा वाह रे भारत के सतासीन लोगो!
कुदरत की ताकत और आदमी की सोच
कुदरत की ताकत यानि प्रकृति की ताकत सर्वोपरि हे आदमी उसको चेलेंज तो करता हैं लेकिन हार जाता हैं , प्रत्यक्ष प्रमाण के लिए जितनी भी देय्विक आप्दै आई उन्हे दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं पाई ,कही भूकंप और कही पानी की अथाह लहरे ,चंद मिनटों मे आदमी की ताकत को बोंना बनाकर निगल गयी हलाकि आदमी ने हवाई जहाज से लेकर रोबट तक बना डाला जिसने भी प्रकृति की ताकत को ललकारने का साहस दिखाया लेकिन कुल मिलाकर,प्रकृति जीव ब्रह्मा या भगवन की ताकत सर्वोपरि हे उसका कोई मुकाबला नहीं हैं !
देश, धर्म और दुनिया
अगर आप संवेदनशील इंसान हैं तो देश की बात करना जरुरी हैं, धर्म एक आवशकता नहीं आवरण हैं जो हमे सामाजिक दृष्टिकोण से सुरक्षित रखती हैं, और दुनियादारी मे हम रहते हुए सारे विचारो को विचरण करते हैं , और अपने आप के लोगो के बीच स्थापित और समानित बनने का पर्यास करते हे जिसको जितनी सफलता मिलती हैं उसको तोलने और परखने का काम वक़्त करता हैं तब जाकर हम समाज मे स्थापित होते हे वक़्त के पाबंद हम सब लोग मेरे विचार से हमारी जीवन पद्धिति मे और घटनाकर्मो मे चाहे वो घटनाक्रम जिन्दगी से जुड़ा हो और चाहे दुनियादारी से वक़्त सबसे वजनदार ताकत हे बेशक वो दिखाई दे या ना दे लेकिन उससे लडने की ताकत किसी में भी कम दिखाई देती हैं यानि वक़्त के सामने सबको झुकते और टूटते देखा हैं अगर कोई बेवजह लडने की कोशिश करता हैं तो वो या तो हार जाता हैं या टूटकर बिखर जाता हैं इसलिए वक़्त के साथ और अनुसार चलना ही नीतिगत हो सकता हैं !
Tuesday, May 24, 2011
नंगा -नाच
पिछले महीनो के अंतराल में जो बेशर्मी का नंगा नाच इस देश वा दुनिया के लोगो ने देखा, उसे देखकर भी कुछ अनुदायियो, मुख्मंत्री, प्रधानमंत्री वा सभी और संतरियो को शर्म नहीं आई बल्कि बेशर्मी के साथ कोमनवेल्थ खेलों मे खर्च की जाने वाली दौलत , खेलों में कम अपनी ज़ेबो मे भरली, देश का नौजवान खिलाडी परेशान होता रहा ,डरता रहा और सोचता रहा की क्या हम उसी भारत वर्ष की संतान हैं जो सोने की चिड़िया कहलाता था, दुनिया भर के लोग जिस धरती के नौजवान को देखने और मिलने का आगाज देते थे इन्ही दिनों हमने देश की गौरव मई सभ्यता को लूटते हुये देखा और रोकने के बावजूद, देश की इज्जत की धज्जिया उडते हुये देखा!
आंतकवाद के विरुद्ध
हाल की ही घटना (लादेन की मौत) कोई अजूबा नहीं हैं बल्कि एक उपलब्धि हैं एक आवाज हैं अहिंसा की हिंसा के विरुद्ध जन- मानस ही नहीं प्रकर्ति भी हिंसा का विरोध करती हैं , जिन लोगो ने अपने स्वार्थ वंश आम जन- मानस की हत्या का इलज़ाम अपने सर पर लेना हैं उनकी खिलाफ आवाज उठनी चहिये , और यह आवाज आज उठ रही हैं , सारी दुनिया में आज हिंसा कई विरुद्ध , भष्टाचार के विरुद्ध और फेर बाजारी और बेईमानी के विरुद्ध आवाज उठाने का वक़्त अब आ पंहुचा हैं .अब और इंतजार अच्छा नहीं हैं. हम सब के अपने देश व समाज के मजबूत और शश्कत बनाने के लिए मेरा आवाहन हैं की आगे आओ और उखाड़ फेके हिंसा , आतकवाद तथा भष्टाचार को , लोग और वक़्त इंतज़ार में हैं
Monday, May 9, 2011
आइने के इंतज़ार मे.
आइना इंसान की आसलियत को दिखाने और समझदार लोगो के समझने के लिए एक शश्कत माध्यम है. देश से घोटालो की भरमार आ गई, जिधर भी देखो आम जनता की पसीने की कमाई से बेवफाई के रंगों की होली खेलने वाले लोगो की बेशर्मी दिखाई दी,चाहे वो नेता हो या अधिकारी किसी ने भी कमी नहीं की जनता की मेहनत की कमाई को लूट लूट कर घर भरने का काम बड़ी बेहरमी और बेदर्दी से किया गया,सारी दुनिया ने थू थू की लेकिन देश के इन शर्मदारो को शर्म नहीं आयी, देश की अस्मिता बेहरमी के दर्द से पीड़ित होती रही तो भी यह देश के ताकतवर ठेकेदार और रखवाले मर्यदायो से खेलते रहे, और सेकड़ो अधिकारी एक दुसरे को कोसते रहे,और सताधारी लोग मुह पर हाथ रखे बेशर्मी से मुस्कुराते रहे, आइने ने भी इनको शर्मसार नहीं किया ,ढेर सारे सवाल आइने की शितिज पर आज भी बिखरे हैं न जाने उन सवालो के जवाब कौन देगा वक़्त और सरकार!
Monday, February 14, 2011
बालविवाह की घिनोनी प्रथा आज भी हमारे देश में हैं
बालविवाह की घिनोनी प्रथा आज भी हमारे देश के अनेको स्थानों में देखने को मिलती हैं, लेकिन मिडिया का चैनल नहीं बोलता , समाज सैनानियो को नीद आ जाती हैं! देश की जनसँख्या लगातार भयानक रूप ले रही हैं! लेकिन सरकार चुप हैं, नायालय चुप हैं, और चुप हैं, समांज के ठकैदार! नोजवांनं शक्ति का अहसास आदिवास से आज तक तक दुनिया में हो रहा हैं!इतिहास गवाह हैं! की बदलाव की दुनिया का आइना हमेशा नोजवानो के चारो तरफ घुमा हैं, जब भी नोजवान शक्ति नै अपने अधिकारी को पहचान कर आगे बदने का अवहान किया! समाज के धरातल पर नतीजे आये हैं आज भी उसी नोजवान ताकत की जरुरत हमारे देश व समाज की घट्नाय आम हैं कही कही तो जहां अभोध बलिकायो के साथ बलात्कार की घटनाओ की खबर आती हैं सर शर्म से झुक जाता हैं ! और में सोचा करता हू! की क्या आजाद भारत की यही तस्वीर हैं जिस भारत को आजाद करने के लिए स्वयं मेरे पिता जी महाशय तेजपाल यादव नै सेकड़ो बार फिरंगियों की लाठिया खाई व जेले काटी नयी आजादी की लड़ाई एक बार और लडने की जरूरत हैं!.
Thursday, February 10, 2011
वर्तमान राजनेतिक रूप
एक ऐसा देश जिसकी इमानदारी की गाथाये सारी दुनिया स्वीकारती हो चाहे महाभारत काल का स्वर्णभावी वीरता का सोंदार्ये रहा हो और चाहे महाकवी कालिदास की भावपुर्ण कविता और रचनाये रही हैं! जब भी ऐसे देश के दामन पर दाग लगते हैं तो सिर्फ दुःख ही नहीं अफ़सोस भी होता हैं, की एक ऐसा देश जिसमे ऋषि मुनियों की तपस्या और वाणी ने हमेशा समाज को रास्ता दिया हो उन्ही ऋषियों का समाज आज स्विस घोटालो में ,कही कोमन- वेल्थ घोटालो कही,आदर्श होउसिंग सोसाइटी घोटालो,तो कही सुखना लेख घोटलो और सबके पिछे छोड़ते हुए जी -३, घोटाला जिसने देश की बुनीयादी नीव को चकनाचूर करने का काम किया!
Monday, February 7, 2011
भ्रष्टाचार की चरमसीमा .
भारत वर्ष जैसे विकासशील देश में जहां नौजवान वर्ग अपने उज्जवल भविष्य की तरफ आशा भरी नजरो से देख रहा हैं वहीँ भष्ट्राचार की पुरजोर आंधी नौजवान की उन् उमीदो की नीव को हिलाकर चकनाचूर करने का काम कर रही हैं! किसी भी देश ,समाज व व्यवस्था में चरित्र हमेशा शीर्ष से मिलता हैं कही किसी बच्चे ने किसी बुजुर्ग को चरित्र देने का काम नहीं किया लेकिन दुर्भाग्य हैं हमारा,हमारे देश का व देश के करोड़ो उन लोगो का जिनके पसीने की बूंदों की कीमत पर देश चलता हैं लेकिन उनके परिणाम व विचारो की कोई कीमत नहीं लगाईं जाती!
भारत वर्ष जैसे विकासशील देश में जहां नौजवान वर्ग अपने उज्जवल भविष्य की तरफ आशा भरी नजरो से देख रहा हैं वहीँ भष्ट्राचार की पुरजोर आंधी नौजवान की उन् उमीदो की नीव को हिलाकर चकनाचूर करने का काम कर रही हैं! किसी भी देश ,समाज व व्यवस्था में चरित्र हमेशा शीर्ष से मिलता हैं कही किसी बच्चे ने किसी बुजुर्ग को चरित्र देने का काम नहीं किया लेकिन दुर्भाग्य हैं हमारा,हमारे देश का व देश के करोड़ो उन लोगो का जिनके पसीने की बूंदों की कीमत पर देश चलता हैं लेकिन उनके परिणाम व विचारो की कोई कीमत नहीं लगाईं जाती!
आज चंदेर्शेखर आजाद, शहीद भगतसिंह व अशफाक उल्ला जैसे बहादुर शहीदों और हजारो स्वतंत्रता सैनानियो जिनमे मेरे पूज्य पितीजी भी सम्मिलित थे! शहीदों की आत्मा रोती होंगी और सोचती होंगी की क्या इन्ही भष्ट्राचारियो के लिए यह देश आजाद कराया था! पूरे देश में और विशेषकर केन्द्र में सतासीन पार्टी के कार्यकर्ताओ में बेईमानी से धर्म कमाने की दौड़ मची हैं, गरीब रो रहा हैं! महिलाय चीख रही हैं!किसान आत्महत्या कर रहा हैं!शहीदों की आत्मा चीत्कार कर रही हैं! नौजवान बदहवास हैं की वो क्या करे, कहां जाए! बेरोजगारी में उठे करोडो नौजवाओ की जुबान पर मुर्दाबाद का नारा हैं और भारतवर्ष के नेताओ और अधिकारियो के स्विस बैंक के खातो में लगातार करोडो अरबों का इजाफा हो रहा हैं आखिर कही से तो जवाब आना चाहिए या तो इस देश की बहादुर जनता से या और खुदा के दरबार से ! मेरे जैसे व्यक्ति इस इंतजार में हैं की लोग जवाब देंगे और भष्टाचार के अन्य भारतीयों को चुनोती देंगे !
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