पिछले महीनो के अंतराल में जो बेशर्मी का नंगा नाच इस देश वा दुनिया के लोगो ने देखा, उसे देखकर भी कुछ अनुदायियो, मुख्मंत्री, प्रधानमंत्री वा सभी और संतरियो को शर्म नहीं आई बल्कि बेशर्मी के साथ कोमनवेल्थ खेलों मे खर्च की जाने वाली दौलत , खेलों में कम अपनी ज़ेबो मे भरली, देश का नौजवान खिलाडी परेशान होता रहा ,डरता रहा और सोचता रहा की क्या हम उसी भारत वर्ष की संतान हैं जो सोने की चिड़िया कहलाता था, दुनिया भर के लोग जिस धरती के नौजवान को देखने और मिलने का आगाज देते थे इन्ही दिनों हमने देश की गौरव मई सभ्यता को लूटते हुये देखा और रोकने के बावजूद, देश की इज्जत की धज्जिया उडते हुये देखा!

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