जिन्दगी का फलसफा भी अजीब हैं जब आदमी रुकना चाहता हैं तो दौड़ना पड़ता हैं और जब दौड़ना चाहता हैं तो वक़्त रुकने का आदेश देता हैं अजीब दस्तावेज हैं ये जिन्दगी!जब दुनिया को देखकर अपने आपको संवारना चाहता हु तो मुश्किलों से लबालब राहे सामने आ जाती हैं और जब उदासी और मायूसी में खोने को दिल चाहता हैं तो राह चलती दुनिया गुनगुनाती हवाए बिखेरने का काम करती हैं अजीब सी दुनिया की अजीब सी राहे और हम वक़्त के हाथो में खेलते हुए खिलोने की भांति कभी टूट कर बिखर जाते हैं या फिर राह से भटक जाते हैं!!!
" बेचैन लम्हों के नाम "
" बेचैन लम्हों के नाम "

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