एक ऐसा देश जिसकी इमानदारी की गाथाये सारी दुनिया स्वीकारती हो चाहे महाभारत काल का स्वर्णभावी वीरता का सोंदार्ये रहा हो और चाहे महाकवी कालिदास की भावपुर्ण कविता और रचनाये रही हैं! जब भी ऐसे देश के दामन पर दाग लगते हैं तो सिर्फ दुःख ही नहीं अफ़सोस भी होता हैं, की एक ऐसा देश जिसमे ऋषि मुनियों की तपस्या और वाणी ने हमेशा समाज को रास्ता दिया हो उन्ही ऋषियों का समाज आज स्विस घोटालो में ,कही कोमन- वेल्थ घोटालो कही,आदर्श होउसिंग सोसाइटी घोटालो,तो कही सुखना लेख घोटलो और सबके पिछे छोड़ते हुए जी -३, घोटाला जिसने देश की बुनीयादी नीव को चकनाचूर करने का काम किया!
Thursday, February 10, 2011
Monday, February 7, 2011
भ्रष्टाचार की चरमसीमा .
भारत वर्ष जैसे विकासशील देश में जहां नौजवान वर्ग अपने उज्जवल भविष्य की तरफ आशा भरी नजरो से देख रहा हैं वहीँ भष्ट्राचार की पुरजोर आंधी नौजवान की उन् उमीदो की नीव को हिलाकर चकनाचूर करने का काम कर रही हैं! किसी भी देश ,समाज व व्यवस्था में चरित्र हमेशा शीर्ष से मिलता हैं कही किसी बच्चे ने किसी बुजुर्ग को चरित्र देने का काम नहीं किया लेकिन दुर्भाग्य हैं हमारा,हमारे देश का व देश के करोड़ो उन लोगो का जिनके पसीने की बूंदों की कीमत पर देश चलता हैं लेकिन उनके परिणाम व विचारो की कोई कीमत नहीं लगाईं जाती!
भारत वर्ष जैसे विकासशील देश में जहां नौजवान वर्ग अपने उज्जवल भविष्य की तरफ आशा भरी नजरो से देख रहा हैं वहीँ भष्ट्राचार की पुरजोर आंधी नौजवान की उन् उमीदो की नीव को हिलाकर चकनाचूर करने का काम कर रही हैं! किसी भी देश ,समाज व व्यवस्था में चरित्र हमेशा शीर्ष से मिलता हैं कही किसी बच्चे ने किसी बुजुर्ग को चरित्र देने का काम नहीं किया लेकिन दुर्भाग्य हैं हमारा,हमारे देश का व देश के करोड़ो उन लोगो का जिनके पसीने की बूंदों की कीमत पर देश चलता हैं लेकिन उनके परिणाम व विचारो की कोई कीमत नहीं लगाईं जाती!
आज चंदेर्शेखर आजाद, शहीद भगतसिंह व अशफाक उल्ला जैसे बहादुर शहीदों और हजारो स्वतंत्रता सैनानियो जिनमे मेरे पूज्य पितीजी भी सम्मिलित थे! शहीदों की आत्मा रोती होंगी और सोचती होंगी की क्या इन्ही भष्ट्राचारियो के लिए यह देश आजाद कराया था! पूरे देश में और विशेषकर केन्द्र में सतासीन पार्टी के कार्यकर्ताओ में बेईमानी से धर्म कमाने की दौड़ मची हैं, गरीब रो रहा हैं! महिलाय चीख रही हैं!किसान आत्महत्या कर रहा हैं!शहीदों की आत्मा चीत्कार कर रही हैं! नौजवान बदहवास हैं की वो क्या करे, कहां जाए! बेरोजगारी में उठे करोडो नौजवाओ की जुबान पर मुर्दाबाद का नारा हैं और भारतवर्ष के नेताओ और अधिकारियो के स्विस बैंक के खातो में लगातार करोडो अरबों का इजाफा हो रहा हैं आखिर कही से तो जवाब आना चाहिए या तो इस देश की बहादुर जनता से या और खुदा के दरबार से ! मेरे जैसे व्यक्ति इस इंतजार में हैं की लोग जवाब देंगे और भष्टाचार के अन्य भारतीयों को चुनोती देंगे !
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