Monday, February 14, 2011

बालविवाह की घिनोनी प्रथा आज भी हमारे देश में हैं

बालविवाह की घिनोनी प्रथा आज भी हमारे देश के अनेको स्थानों में देखने को मिलती हैं, लेकिन मिडिया का चैनल नहीं बोलता , समाज सैनानियो को नीद आ जाती हैं! देश की जनसँख्या लगातार भयानक रूप ले रही हैं! लेकिन सरकार चुप हैं, नायालय चुप हैं, और चुप हैं, समांज के ठकैदार! नोजवांनं शक्ति का अहसास आदिवास से आज तक तक दुनिया में हो रहा हैं!इतिहास गवाह हैं! की बदलाव की दुनिया का आइना हमेशा नोजवानो के चारो तरफ घुमा हैं, जब भी नोजवान शक्ति नै अपने अधिकारी को पहचान कर आगे बदने का अवहान किया! समाज के धरातल पर नतीजे आये हैं आज भी उसी नोजवान ताकत की जरुरत हमारे देश व समाज की घट्नाय आम हैं कही कही तो जहां अभोध बलिकायो के साथ बलात्कार की घटनाओ की खबर आती हैं सर शर्म से झुक जाता हैं ! और में सोचा करता हू! की क्या आजाद भारत की यही तस्वीर हैं जिस भारत को आजाद करने के लिए स्वयं मेरे पिता जी महाशय तेजपाल यादव नै सेकड़ो बार फिरंगियों की लाठिया खाई व जेले काटी नयी आजादी की लड़ाई एक बार और लडने की जरूरत हैं!.