पिछले महीनो के अंतराल में जो बेशर्मी का नंगा नाच इस देश वा दुनिया के लोगो ने देखा, उसे देखकर भी कुछ अनुदायियो, मुख्मंत्री, प्रधानमंत्री वा सभी और संतरियो को शर्म नहीं आई बल्कि बेशर्मी के साथ कोमनवेल्थ खेलों मे खर्च की जाने वाली दौलत , खेलों में कम अपनी ज़ेबो मे भरली, देश का नौजवान खिलाडी परेशान होता रहा ,डरता रहा और सोचता रहा की क्या हम उसी भारत वर्ष की संतान हैं जो सोने की चिड़िया कहलाता था, दुनिया भर के लोग जिस धरती के नौजवान को देखने और मिलने का आगाज देते थे इन्ही दिनों हमने देश की गौरव मई सभ्यता को लूटते हुये देखा और रोकने के बावजूद, देश की इज्जत की धज्जिया उडते हुये देखा!
Tuesday, May 24, 2011
आंतकवाद के विरुद्ध
हाल की ही घटना (लादेन की मौत) कोई अजूबा नहीं हैं बल्कि एक उपलब्धि हैं एक आवाज हैं अहिंसा की हिंसा के विरुद्ध जन- मानस ही नहीं प्रकर्ति भी हिंसा का विरोध करती हैं , जिन लोगो ने अपने स्वार्थ वंश आम जन- मानस की हत्या का इलज़ाम अपने सर पर लेना हैं उनकी खिलाफ आवाज उठनी चहिये , और यह आवाज आज उठ रही हैं , सारी दुनिया में आज हिंसा कई विरुद्ध , भष्टाचार के विरुद्ध और फेर बाजारी और बेईमानी के विरुद्ध आवाज उठाने का वक़्त अब आ पंहुचा हैं .अब और इंतजार अच्छा नहीं हैं. हम सब के अपने देश व समाज के मजबूत और शश्कत बनाने के लिए मेरा आवाहन हैं की आगे आओ और उखाड़ फेके हिंसा , आतकवाद तथा भष्टाचार को , लोग और वक़्त इंतज़ार में हैं
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