बाबा रामदेव जी ने फिर भष्ट्राचार व भष्ट्राचारियो, के विरुद्ध देश की जनता की जगाने की आवाज दी हैं . योग गुरु की कलम झूठी नहीं हैं देश के लोगो की पसीने की कमाई को लूट कर जिन हुकुमरानो ने देश के बाहर अपनी ऐश परास्ती के लिए बाहर देशो और बैंको में अपने काले धन को जमा किया हैं, उसका खुलासा और उनकी विरुद्ध कार्यवाही की जाए, एक देश भगत की आवाज देश के हित में उभरी हम देश के सभी स्वाभिमानी लोगो को उनका साथ देना चाहिए ताकि देश में छुपे गद्दारों के चेहरे बेनकाब हो, ४ जून को शुरू हुआ आन्दोलन सफल हो ऐसी शुभ कामनाये हमारी होनी चाहिए!
Friday, June 10, 2011
Thursday, June 9, 2011
हमारा नेतिक पतन
आज जबकि दुनियाभर में एक अजीब रफ़्तार का युग हैं सब एक दुसरे से आगे निकलने की चेष्टा में भागे जा रहे हैं, आगे बढने की चाह में बहुत कुछ पीछे छुट गया हैं पीछे छुट गई हमारी अद्यात्मिक शांति ,एक दुसरे के प्रति हम दर्दी ,हमारा सुख और चैन , अराजकता सी हैं आगे बढने की दौड़ में शामिल होंना कोई बुरी बात नहीं हैं,लेकिन जिन्दगी की कीमत पर नहीं नेतिकता की कीमत पर नहीं , अगर हम चंद सिक्को के लिए जिन्दगी जीने का अर्थ ही भूल गए तो एक अन्धकार में खो जाने का डर हमेशा बना रहेगा,
बात और बहस आज के संधर्भ में शिक्षा की होनी चाहिए ,रोजगार की होनी चाहिए ओर किस तरह हम देश के करोड़ो नोजवान को सही दिशा डे सकते हैं, लेकिन हम दिन बा दिन एक गुमराही अंधरे की तरफ चलते जा रहे हैं , जिससे खबरदार रहना हैं!
दुर्भाग्यपूर्ण
देश के इतिहास में फिर एक हिटलरी आदेश व तुगलकी आवाज के बयान यानि सता ने एक बार फिर अपनी क्रूरता का परिचय दिया , एक सन्यासी जो देश और दुनिया के गरीबो को अपने योग शाश्त्र के आधार पर जीवन जीने की राह दिखा रहा था उसने देश में फेले भष्ट्राचार व भष्ट्राचारियो, सत्ता के दलालों के विरुद्ध जेहाद छेड़ने की कोशिश की लेकिन बेईमान और भष्ट्राचार डूबकी लगाकर इस देश के मेहनत काश लोगो के धन को डकार कर विदेशी बेंको में जमा करा दिया , तुमने अपना करिश्मा बाबा रामदेव पर लाठी बरसाकर गरीब लोगो की भावना को लहुलुहान करने का काम कर डाला वाह रे भारतवर्ष के रहनुमा वाह रे भारत के सतासीन लोगो!
कुदरत की ताकत और आदमी की सोच
कुदरत की ताकत यानि प्रकृति की ताकत सर्वोपरि हे आदमी उसको चेलेंज तो करता हैं लेकिन हार जाता हैं , प्रत्यक्ष प्रमाण के लिए जितनी भी देय्विक आप्दै आई उन्हे दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं पाई ,कही भूकंप और कही पानी की अथाह लहरे ,चंद मिनटों मे आदमी की ताकत को बोंना बनाकर निगल गयी हलाकि आदमी ने हवाई जहाज से लेकर रोबट तक बना डाला जिसने भी प्रकृति की ताकत को ललकारने का साहस दिखाया लेकिन कुल मिलाकर,प्रकृति जीव ब्रह्मा या भगवन की ताकत सर्वोपरि हे उसका कोई मुकाबला नहीं हैं !
देश, धर्म और दुनिया
अगर आप संवेदनशील इंसान हैं तो देश की बात करना जरुरी हैं, धर्म एक आवशकता नहीं आवरण हैं जो हमे सामाजिक दृष्टिकोण से सुरक्षित रखती हैं, और दुनियादारी मे हम रहते हुए सारे विचारो को विचरण करते हैं , और अपने आप के लोगो के बीच स्थापित और समानित बनने का पर्यास करते हे जिसको जितनी सफलता मिलती हैं उसको तोलने और परखने का काम वक़्त करता हैं तब जाकर हम समाज मे स्थापित होते हे वक़्त के पाबंद हम सब लोग मेरे विचार से हमारी जीवन पद्धिति मे और घटनाकर्मो मे चाहे वो घटनाक्रम जिन्दगी से जुड़ा हो और चाहे दुनियादारी से वक़्त सबसे वजनदार ताकत हे बेशक वो दिखाई दे या ना दे लेकिन उससे लडने की ताकत किसी में भी कम दिखाई देती हैं यानि वक़्त के सामने सबको झुकते और टूटते देखा हैं अगर कोई बेवजह लडने की कोशिश करता हैं तो वो या तो हार जाता हैं या टूटकर बिखर जाता हैं इसलिए वक़्त के साथ और अनुसार चलना ही नीतिगत हो सकता हैं !
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