Thursday, July 14, 2011
अमर शहीदों के नाम
ये देश हमारा देश यानि भारत देश यानि मेरा देश जब आजाद हुआ होगा तो आजादी के लिए यातना भोगने वाले ,जेल काटने वाले या अमर शहीदों ने अपना सावार्थ नौछवर करने वाले चंदेर्शखेर ,आजाद भगतसिंह ,राजगुरु सुखदेव व् अशरफ उल्ला जैसे बहादुर बेटो ने यह सोचकर शहीदी दी होगी की कल एक भारत बनेगा जो गुलामी से मुक्त होगा , जहाँ अंग्रेज नही होगा, जहाँ उत्पीडन नहीं होंगा, जहा दुविधा नहीं होंगी और नहीं होगी गरीबो, मजदूरो, व किसानो की इज्ज़त नीलाम , आजादी मिल गयी लेकिन बाकि स्वाभिमान लुटता रहा पिटता रहा, और हमारी बेबस आंखे तलाशती रही अपने पूर्वजों के सपनो को की कही और कभी वो भी सच होंगे आज भी उन्ही का इंतज़ार हैं !
वर्तमान और नौजवान (हिन्दुस्तान का नौजवान)
असलियत में इस देश के नौजवान की पीड़ा को पहचानने का काम किसी ने कभी किया ही नहीं वदलाव हमेशा सता से आता हैं या फिर आन्दोलन से, सता इस देश में बहुत दिनों तक कांग्रेस की रही, उन्होने नारे तो नौजवानों से खूब नारे लगवाए लेकिन जब नौजवान को कुछ देने व अधिकारों की बात आई तो हमेशा सता पक्ष इधर उधर की बात करता रहा, हालाँकि बहुत सारे समाजसवियो व नौजवानों को हम जैसे हमदर्दों ने अवाज दी और कहा , की देवता का कारवां क्यों लुटा लेकिन जवाब कभी नहीं आया ,जो देश व् भविष्य की असली ताकत हैं अगर उसकी अनदेखी इस तरह होगी तो कौन सा भारत हम बनायेगे , कोई नहीं जानता !
Tuesday, July 12, 2011
१. घटना या दुर्घटना या फिर कुछ और /तेरी दुआ बन गई मेरी दवा !
यह घटना खुद मेरे साथ दिनाक ९/७/११ के पंजाब के सगरूर प्रान्त के मूनक में घटी रात्रि का १ बजा था मैं तथा मेरे सहयोगी दो गाडियों में हिसार से एक प्रतिष्ठित परिवार कमिश्नर की बेटी की शादी से वापिस लौट रहे थे चण्डीगढ़ के लिए ,अचानक घर्र्घर नदी के पुल से पहले सड़क में ९० अंगेल का मौड़ आया ना मैं तैयार था और ना ही मेरा ड्राईवर लेकिन वक्त तैयार था, अचानक मेरी गाड़ी जिसकी रफ़्तार १२० के करीब थी लहराई और नदी के किनारे पर पलडा खाती हुई नीचे पेड़ो के झुरमुट में उलटी होकर रुक गयी ,मेरे पीछे बाकि पोलिसे की सुरक्षा गाड़ी का भी यही हाल हुआ वो भी पलट गयी ,होश हवास लापता हो गये लेकिन भगवान की दी हुई हिम्मत फिर काम आ गयी मैंने अपनी गाड़ी को ऊपर वाले गिएर को तोड़ डाला , और हिम्मत ए मर्द ,मर्द ये खुदा की कहावत चिरर्त्ताथ हो गई ,में गाड़ी के बाहर आ गया और फिर सारे सटाफ को दोनों गाडियों से बाहर निकाला पोलिसे अधिकारियो को घटना की सुचना दी, ताकि हमे सहायता मिल सके यह देखकर जरुर साहस हुआ! लेकिन इतने भयानक मोड पर भी सड़क ज्ञानवर्धन का कोई चिन्ह सरकार ने नही लगाया था, जिसकी वजह से दुर्घटना हुई, हम अमबुलंस से मूनक शहर के सिविल हॉस्पिटल में गये, घायल लोगो की फर्स्ट अड़ हो गयी अब तक यकीं नहीं होता की हम बच गए , इलाज के बाद में अपने सहयोगियों के साथ अपनी सुगर मिल धुरी चला गया ,तब तक समाचार आख्बर्रो में छप चूका था बस ऐसे लगा जैसे काँटा लगा मेरे पाव मैं और दर्द हो गया सारे गाव मैं , मोबाइल फोंस की झड़ी लग गयी ऐसा लगा जैसे सर्री दुनिया मेरी हमदर्द हैं और भगवन मेरा मालिक ,ऐसा लगा की जैसे आप लोगो की दुआऊ ने दवा बनकर मेरी रक्षा कर ली ,मैं फिर आज दिनाक ११ को डेल्ही के लिए और मेरी टूटी गाड़िया वोर्क्शोप के लिए रवाना हो गए !!
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