मैं आपकी दोस्ती और शुभकामनायो की कद्र करता हूँ , भविष्य में भी मेरे विश्वास को आप इसी तरह बल देते रहेगे, सौ बार शुक्रिया !!
Friday, August 12, 2011
Monday, August 8, 2011
समीक्षा लोकतंत्र की
अन्ना हजारे ने अपने बूते दिल्ली में लोकतंत्र की समीक्षा कर ही डाली बढती उम्र के अनुभवी कदमो ने फिर एक बार चांदनी चौक के आम आदमी के मन को नाप डाला तो पता चला की जनता का मन और मत कपिल सिबल के साथ नहीं बल्कि एक भष्ट्राचार के विरुद्ध उठी आवाज के साथ हैं , मंथन हुआ बेशक यह मंथन सुर और असुरो की वक़्त का न सही यह मंथन हैं आजाद भारत के लोकतंत्र का जहाँ का आम आदमी चाहता हैं की कानून सबके साथ एक जैसा हो चाहे कोई रजा हो या रंक हो अंधे कानून की लाठी की चोट पूंजीपति और गरीब, नौकरीपेशा और अधिकारी, नायाधिश और पटवारी सबकी सिर पर एक जैसी होनी चाहिए!!!!
शिक्षित भी बेरोजगार
किसी भी आजाद मुल्क की चुनी हुई सरकार की जिम्मेदारी उस देश के नागरिको को रोजगार मोहैया कराने की होती हैं, लेकिन अजीब मुल्क के बशिँदै हैं हम लोग, जहाँ का नौजवान शिक्षित होकर भी दर-दर की ठोकर खाने के लिए मजबूर हैं, मासूम होकर वह अपराध, चोर व डाकू बन रहा हैं, अब तो शिक्षा से भी नौजवान का विशवाश उठने लगा हैं इसलिए उ. प. के व्यव् सयिक शिक्षको ,के दाखिलो की भारी कमी आई हैं यह हैं हमारे जैसे देश की बेइमानी !!!!!
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