Thursday, August 18, 2011

आरक्षण के नाम पर फिल्मे!

  
 वैसे इसे हमारा दुर्भाग्य ही कहा जाएगा , की हम इंसानों में नहीं जातियों और धर्मो में   पैदा होती हैं, और मरते हैं, यह नियम प्रकर्ति विरुद्ध हैं, लेकिन हमारे समाज- शाश्त्रियो ने धरम के ठेकेदारों ने या घिनोनी राजनीती करने वाले राज-नेताओ ने समाज के इस गढ़दे में धकेला हुआ हैं जिससे हम पर्यास के बावजूद भी निकल नही पा रहे ऊपर से आरक्षण जैसी फिल्मे आग में घी का काम कर रही हैं,इसमें कोई दो राय नहीं हैं की कमजोर को, गरीब को, पिछडो को, दलितों को आगे आने का अवसर मिलना चाहिए, ना की  उनको धिक्कारना चाहिए न धमकाना चाहिए के वो दीन हीन हैं ही और धमकाओगे  तो बेचारे की हिम्मत व् विश्वाश टूटेगा इसलिए फिल्मों से सन्देश और नसीहत मिले जो गरीब के लिए उत्साहवर्धक हो, स्वस्थ हो और समस्या को हल करने वाली हो रास्ता बताने वाली हो,
चरित्र हमेशा शीर्ष से मिलता हैं किसी बच्चे ने आज तक अपने बाप  का चरित्र  नहीं दिया , इसलिए शिक्षित लोगो के, बडे लोगो के तथाकथित बड़ी जातियों के अपने चारित्रिक बदलाव लाना चाहिए और गरीब, दीन हीन को गले से लगाना चाहिए!!

""छोड़कर अपने स्वार्थ की बातें उन्हें भी गले से लगालो तो   कोई बात बने !!
धमकाने और सताने से कुछ नहीं मिलता उनके साथ मिलके मुस्कुराओ तो कोई बात बने !!

Wednesday, August 17, 2011

अन्ना के साथ बदसलूकी !!

आखिरकार सता के दुरूपयोग की कथा की शुरवात भारत सरकार ने दिली की धरती पर अन्ना के साथ दुर्वव्हार करके बता ही दिया की लोकतंत्र में हमारा विश्वाश नहीं, अगर किसी ने भष्ट्राचार के विरुद्ध आवाज उठाई , तो हम उसका जवाब तुगलकी अंदाज़ में देंगे, वो चाहे योग गुरु रामदेव हो या समाज सेवी अन्ना हजारे, उसको ठिकाने लगाने में कोई देर नहीं लगायेगे ,दिली की भीगी सडको पर भागते हुए बदहवास लोगो की भीड़ आज देखी जा सकती हैं!

ये मेरे देश के लोगो अगर आपने ऐसी निरंकुश सता के ठेकेदारो को भी जवाब नहीं दिया तो यह आपके जीवन पर भी धिकार होगा और देश के लिए क़ुरबानी देने वाले महान सपूतो के जीवन पर भी कलंक होगा! """"आओ उठो और बिगडते हुए लोकतंत्र की तस्वीर को सावरे"""!!11

Tuesday, August 16, 2011

रक्षाबंधन

रक्षाबंधन के दिन जब मैं घर से निकला चलते चलते ठिठक कर एक मौड़ पर रुका, एक युवती ने मुझे आवाज दी दीन सी, हीन सी, फीकी मुस्कान के साथ मुझसे कह रही थी, मैं भी तुम्हारी बहन हु, देखो मेरी आँखों मैं भी सपने हैं, कही सीमा पर या सीमा पार गए जो भी मेरे अपने हैं , वक़्त की बेहरमी से लडते लडते में थक गई हु, नहीं तो मैं कोई बीता वक़्त नहीं, मैंने गौर से देखा उसके चेहरे की तरफ गरीबी और आभाव की निशानी उसके चेहरे पे थी! बेवजह अपमान सहने की कहानी उसके चेहरे पे थी. मैंने कहाँ में तो तुम्हारा कोई नहीं कैसे जानती हो मुझे , उसने कहाँ, मेरा तुम्हारा भाई बहन का रिश्ता हैं, मुझे देखकर भी, छोड़कर भागे जा रहे हो, में इसलिए राखी लेकर खड़ी हु, शायद तुम आभाव, गरीबी, भय, और आतंक से युद्ध करने जा रही हो. !!!!